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नेपाल में भीषण बाढ़ के बाद चीन से डेटा शेयरिंग की नई मांग

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Nepal Floods Early Warning Systems China Disaster Risk
Green trees and mountains under blue sky during daytime
Photo by Avel Chuklanov on Unsplash

भीषण बाढ़ से जान-माल का भारी नुकसान झेलने के बाद नेपाल ने चीन से डेटा शेयरिंग और आपदा पूर्व चेतावनी सहयोग बढ़ाने की मांग फिर से तेज कर दी है।6

आखिर हुआ क्या

नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने सरकार को सीमा पार बेहतर सूचना साझाकरण के लिए चीन से संपर्क करने पर मजबूर कर दिया।1

चीन के ग्यीरोंग काउंटी में ग्यीरोंग पोर्ट के पास दो दिन पहले आए भूस्खलन के बाद कम्युनिस्ट पार्टी का झंडा लिए अर्धसैनिक पुलिस बल खोज और बचाव अभियान चला रहा था।6

बड़ी आपदाओं पर नजर रखने वाले अंतरराष्ट्रीय मंच ग्लोबल डिजास्टर अलर्ट एंड कोऑर्डिनेशन सिस्टम ने नेपाल के लिए सबसे गंभीर स्तर, यानी रेड फ्लड अलर्ट, जारी कर रखा था।5

पूर्व चेतावनी प्रणाली को फिर से खड़ा करने की कोशिश

जानकार सूत्रों के मुताबिक, इस भीषण बाढ़ के बाद नेपाल अपनी चीन सीमा पर लगी बाढ़ पूर्व चेतावनी प्रणाली को फिर से दुरुस्त करने में जुटा है।7

आपदा के बाद देश अपने चीन-सीमा चेतावनी तंत्र को जल्द से जल्द बहाल करने की कोशिश में लगा है।8

चर्चा में शामिल अधिकारियों और विशेषज्ञों ने साझा जोखिम कम करने के लिए ग्लेशियर झीलों की गिनती और खतरा-मानचित्रण जैसे कदमों की मांग की।6

स्थानीय स्तर की चेतावनी व्यवस्था ने बचाईं जानें

बाढ़ के दौरान जहां आधिकारिक चेतावनी तंत्र नाकाम रहा, वहां गांव-स्तर पर बने विकेंद्रीकृत, सामुदायिक चेतावनी नेटवर्क ने कई लोगों की जान बचाई।3

यह स्थानीय पहल दिखाती है कि जब सरकारी निगरानी तंत्र क्षतिग्रस्त हो जाए या मौजूद ही न हो, तब स्थानीय जानकारी और आपसी तालमेल किस तरह उस कमी को पूरा कर सकते हैं।3

बिना किसी चेतावनी के क्यों आई बाढ़

नेपाल की यह बाढ़ दुर्लभ और बेहद घातक बताई जा रही है, और यह उस तरह की अग्रिम चेतावनी के बिना ही आई जो लोगों को समय रहते तैयारी करने का मौका देती।4

चेतावनी न मिल पाना अब उन अधिकारियों के लिए सबसे बड़ा सवाल बन गया है जो भविष्य में ऐसी आपदाओं को रोकने के उपाय तलाश रहे हैं।4

चीन का डेटा और साझा जोखिम

नेपाल की इस नई कोशिश का मकसद चीन से ऐसा डेटा हासिल करना है जिससे नदी के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों तक तेज और भरोसेमंद पूर्व चेतावनी पहुंचाई जा सके।1

चर्चा में शामिल लोगों ने खतरा-मानचित्रण और ग्लेशियर झीलों की गिनती को साझा बाढ़ जोखिम घटाने के अगले ठोस कदम के तौर पर सुझाया।6

आगे क्या होगा

सूत्रों के मुताबिक, नेपाल की सीमावर्ती पूर्व चेतावनी प्रणाली को फिर से खड़ा करने का काम अभी भी जारी है और आपदा के बाद भी यह प्रयास रुका नहीं है।7,9

अधिकारी अब भी इस पर विचार कर रहे हैं कि सामुदायिक चेतावनी व्यवस्था और सीमा पार से मिलने वाले डेटा को कैसे साथ मिलाकर एक और बड़ी, बिना चेतावनी वाली आपदा का खतरा कम किया जाए।3,4

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